Tuesday, 30 July 2013
Platform for Women Empowerment | Women Empowerment in India
Economic benefits of women empowerment- Most women across the globe rely on the informal work sector for an income.
Friday, 28 June 2013
उत्तराखंड त्रासदी हमारे विकास के मॉडल को चुनौती है
उत्तराखंड त्रासदी वर्तमान विकास के ऊपर एक प्रश्न चिन्ह है -और हमारे विकास के मॉडल को चुनौती है
त्रासदी को हमशब्दों में बयां नहीं कर सकते जिन्होंने अपने जन धन खोएं हैं उसकी भरपाई तो नहीं हो सकती,
हम आभारी है उन सभी लोगों के जिन लोगों ने इस बीभत्स परिस्थिति में कंधे से कन्धा मिलाकर लोगो को बचाने में अपना योगदान दिया । सलाम है उन जवानों को जिन्होंने जान गंवाकर के भी अपने लोगों को बचाने में कोई कसर न छोड़ी हम उनके साहसिक प्रयासों को तहे दिल से सलाम करते हैं । ईश्वर इस आपदा में अपने प्रियजनों को खोने वाले लोगों को इसे सहने की शक्ति दे। दुख की इस घड़ी में समूचा भारतवर्ष उनके साथ है ।
विकास ऐसा होना चाहिए जो प्रकृति के नियमानुकूल हो, ना कि प्रकृति को अपने सुविधा अनुसार केवल और केवल दोहन और उसके बाद उसको उसी हाल पे छोड़ देना, ऐसा करना ही ऐसे त्रासदी को निमंत्रण देते हैं.
कुदरत के साथ बदसलूकी इतनी महंगी पड़ेगी इसका अंदाजा शायद किसी को नहीं था। हम में से बहुत से लोगों ने अत्यंत ही नजदीक से पर्वतीय क्षेत्रो में कुदरत द्वारा स्थापित पेड़, जंगल, घाटियाँ आदि देखी है या देखी होंगी।
जिस प्रकार से संसाधनों का दोहन हो रहा है, दिन प्रति दिन पर्वतो और पेड़ों की कटाई और होटल का निर्माण, पानी को रोकना और जगह जगह नदियों के पानी को रोक कर के बांधो का निर्माण अपने आप में एक बहुत बड़ा कारण है ।
जिस प्रकार से संसाधनों का दोहन हो रहा है, दिन प्रति दिन पर्वतो और पेड़ों की कटाई और होटल का निर्माण, पानी को रोकना और जगह जगह नदियों के पानी को रोक कर के बांधो का निर्माण अपने आप में एक बहुत बड़ा कारण है ।
जिसको हमने विकास का नाम दिया है शायद वास्तविक रूप से अगर देखा जाये तो वो प्रकृति के विनाश का ही रूपांतरण है । जिस स्थान पर पर्वत श्रिंखला दिखती थी। उन जगहों पर हाईवे बना दिया नतीजन जो पर्वत और पेड़ पहाड़ो को बांधे रखने का काम करते थे वो सारे अलग थलग पड़ गए। पेड़ की लगातार कटाई पर्वतों को नंगा करता गया और ऊपर से आने वाले पानी के धार में रूकावट ना होने के कारण जलधारा का वेग बढ़ा और बढ़ी हुई पानी की मात्रा ने बाढ़ का रूप ले लिया । पहले ढलान पर किसान वेदिका बना कर के खेती का काम करते थे ।
आज वेदिका के स्थान पर होटल दुकान और क्या क्या बन गए जिस से पानी की धारा को रोकना असंभव हुआ और नहीं तो हमने नदी के रास्ते को सड़क बना दिया अर्थात यह कहे की मनुष्य ने प्रकृति प्रदत चीजों का अतिक्रमण कर लिया और अतिक्रमण किसी भी रूप में हो प्रकृति को स्वीकार्य नहीं है। हमने अभी हाल में ये समाचार देखा कि उत्तराखण्ड में ढेर सारे पॉवर प्रोजेक्ट चल रहे हैं या मूर्त रूप लेने वाले हैं । इतनी कुर्बानी देकर ये विकाश का तांडव न्य्यायोचित नहीं है
आज वेदिका के स्थान पर होटल दुकान और क्या क्या बन गए जिस से पानी की धारा को रोकना असंभव हुआ और नहीं तो हमने नदी के रास्ते को सड़क बना दिया अर्थात यह कहे की मनुष्य ने प्रकृति प्रदत चीजों का अतिक्रमण कर लिया और अतिक्रमण किसी भी रूप में हो प्रकृति को स्वीकार्य नहीं है। हमने अभी हाल में ये समाचार देखा कि उत्तराखण्ड में ढेर सारे पॉवर प्रोजेक्ट चल रहे हैं या मूर्त रूप लेने वाले हैं । इतनी कुर्बानी देकर ये विकाश का तांडव न्य्यायोचित नहीं है
समस्त मानव समुदाय के लिए यह एक सबक है की कुदरत के अनुरूप ही कार्य करें, जहाँ पर कुदरत की बनाई व्यवस्था में अपने सुविधा अनुसार फेरबदल की कोशिश होगी तो स्वाभाविक है उसके दुस्परिणाम भी होंगे।
जिस स्थान को हम देव भूमि कहते हैं आजकल उन स्थानों को लगभग पर्यटन स्थान के रूप में चिन्हित करा दिया गया है, जिसका नतीजा मात्र २ वर्षों में गाड़ियों की संख्या दोगुनी हो जाती है और देवभूमि जगहों पर स्रधालु कम पर्यटकों की भीड़ ऐसी हो जा रही है जिसके कारण स्वाभाविक संतुलन असंतुलित होता जा रहा है। यह विषय विचार और चिंतन का है | जिसको हमें समझाने और समझने की ज़रूरत है।
लेखिका सांवरी वोमेन पॉवर क्लब की संस्थापिका हैं
Tuesday, 14 May 2013
सार्वजानिक सम्मान
यदि वास्तव में ही आप नारी के प्रति अपने मन में सम्मान की भावना रखते हैं तो अपनी कामयाबी का श्रेय अपनी पत्नी को भी देना सीखिए क्योंकि कंही न कहीं आपके उन्नति का प्रेरणा स्रोत और सूत्रधार आपकी अर्धांग्नी ही है । जो जाने अनजाने हमेशा आपके साथ रहती है । जरा गौर करे हमारे देश में लगभग सारे व्रत केवल पत्नी ही रखती है। अपने पति के कुशलता के लिए कुछ बहने तो पानी तक नहीं लेती, सोचिये क्या यह त्याग विचारणीय नहीं है।
मुझे तो ऐसा लगता है कि जो अपने जीवन में पत्नी के योगदान को नहीं समझ पाते क्या अपने जीवन में, देश के प्रति, मात्रभूमि के प्रति, स्त्री के योगदान को क्या समझेंगे।
समाचार देखते हुए मैंने ये सुना और देखा था की अपनी विजय के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा जब विक्ट्री स्पीच देने आये तो उन्होंने यह कहा कि आज मै जहा भी हूँ वंहा तक अपनी पत्नी मिशेल की वजह से पहुच पाया हूँ । खुशी के उन सार्वजानिक पलो में अपना पहला धन्यवाद उन्होंने पत्नी को समर्पित किया । पराजय के बाबजूद श्री मिट रोमनी भी अपनी पत्नी को दिए सह्यॊग के लिए धन्यवाद देना नहीं भूले । अपनी जीत पर अपने जीवन संगिनी के साथ खड़े होने , संघर्ष करने और सार्वजानिक रूप से उसके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना । यह तभी संभव है जब केवल मूंह से नहीं बल्कि मन से दिल से महिलाओं का सम्मान हो।
यह आवश्यक नहीं है कि आपकी पत्नी एक अच्छी बिज़नस वोमेन हो वकील हो डॉक्टर हो या इंजिनियर हो यदि वो घर पर रहकर एक होम मेकर का रोल अदा कर रही है तो मेरा यह मानना है कि एक अच्छे घर को बनाना शायद एक अच्छे बिज़नस को को चलाने से ज्यादे कठिन है।
यह आवश्यक नहीं है कि आपकी पत्नी एक अच्छी बिज़नस वोमेन हो वकील हो डॉक्टर हो या इंजिनियर हो यदि वो घर पर रहकर एक होम मेकर का रोल अदा कर रही है तो मेरा यह मानना है कि एक अच्छे घर को बनाना शायद एक अच्छे बिज़नस को को चलाने से ज्यादे कठिन है।
नारी के अन्दर भगवान ने इतना पेशेंस दिया है कि वह घर में रहकर हर रिश्ते को भरपूर तरीके से जीती है । कभी बहू के रूप में कभी माँ के रूप में और कभी पत्नी के रूप में वह परिवार के लिए सहारा बनती है । अपने बच्चों को जो हमारे और हमारे देश का भविष्य होते हैं अच्छे संस्कार देती हैं जो लाखों की संपति देने के बजाय ज्यादा जरूरी है |
मेरे विचार से एक पति के द्वारा दिया हुआ यह सार्वजानिक सम्मान पत्नी के लिए सबसे उत्तम सम्मान है।
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जय शक्ति जय भारत
लेखिका [ सीमा गोयल ] सांवरी वोमेन पॉवर क्लब कि संस्थापिका है|
Sunday, 14 April 2013
संविधान के वास्तुकार अम्बेडकर जी का जन्म दिन और वर्तमान भारत
भारतीय संविधान के वास्तुकार अम्बेडकर जी ने हमारे देश को और हमारे समाज को जो दिया है शायद हम उसकी तुलना नहीं कर सकते जब डॉक्टर साहेब 1942 में गवर्नर जनरल की कौंसिल में शामिल हुए तथा जब श्रम मंत्री का दायित्व संभाला तो उन्होंने इस अवसर का भरपूर उपयोग देश की उन्नति और प्रगति के लिए किया. उन्होंने मजदूरों की दयनीय दशा देखते हुए उनके लिए काम के लिए 8 घंटे का समय तय करवाया, महिला मजदूरों के लिए प्रसूति अवकाश की व्यवस्था लागू की।
देश में वर्षा के मौसम में आने वाली बाढ़ और गर्मी में सूखे की समस्या से निजात पाने तथा रोज़गार के लिए उद्योग लगवाने के लिए बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना का ड्राफ्ट स्वयं तैयार किया. आधुनिक भारत में चल रही सभी नदी घाटी परियोजनाए बाबासाहब की दूरदर्शिता का ही परिणाम है। यह बात शायद बहुत कम लोगो को पता होगी क्योंकि सामान्यतया बाबा साहेब का नाम आते ही लोग संविधान तक ही सिमट के रह जाते हैं।
बाबासाहब ने संविधान को देश में समता और स्वतंत्रता स्थापित करने का एक कानूनी माध्यम के रूप में स्थापित किया और इसके द्वारा देश से छूआछूत, जातिवाद, लिंगभेद और वर्गभेद सहित तमाम विषमताओं का खात्मा कर दिया पर वे भली भांति जानते थे की कानून से सिर्फ किसी अपराध को नियंत्रित किया जा सकता है|
आज हम जहाँ भी देखते हैं हर 15 किलो मीटर के बाद 1 या 2 मूर्ति तो नजर आ ही जाती है । बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर जी की लेकिन क्या सही मायने में यही उनके विचारों की अभिव्यक्ति है। आज का भारतीय जनतंत्र पूर्णरूपेण जातीय, क्षेत्रीय एवं सांप्रदायिक जनतंत्र में बदल चुका है। जहाँ पर कुछ लोग अल्पकालिक स्वार्थ सिद्धि के लिए बाबा साहेब के नाम का प्रयोग करते हैं लेकिन मुख्य विचारधारा से वो कोसों दूर है । बाबा साहेब ने जाति-उन्मूलन की विचारधारा पर बल दिया था । जहाँ पर कोई धर्म अगर है तो वह मानव धर्म है परन्तु वर्तमान तथा भुत पर अगर दृष्टी डाले तो हम पाते हैं कि वास्तविकता कुछ और ही है । जाति विहीन समाज कि कल्पना के विपरीत होकर वर्तमान समाज और भी निंदनीय होता जा रहा है|
डॉक्टर भीम राव ने कहा था कि मै किसी समुदाय की प्रगति उस मापदंड से करता हूँ कि उस समुदाय की महिलाओं ने किस हद तक तथा कितनी प्रगति हासिल की है । जान के आश्चर्य होगा कि २१७ सदस्यों कि संघीय सभा में १५ महिलायें थी । आज ६ ६ वर्षों के उपरान्त हमारे लोकसभा में मात्र ५ ९ महिला सांसद है । मैंने ये देखा है कि हर सत्र में इस विषय [५ ० फीसदी सीट लोकसभा तथा राज्य सभा में ] पर चर्चा तो अवश्य होती है । परन्तु हमारे राजनीतिज्ञ यह स्वीकार करने को बिलकुल भी तैयार नहीं है कि ५ ० % महिला प्रतिनिधि की संख्या हमारे संसद में सुनिश्चित हो जाये । इसका मुख्य कारण राजनीतिज्ञों में दृढ इच्छासक्ति तथा कुशल नेतृत्व का अभाव है। हमारे राजनीतिज्ञ इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि महिला वर्ग को ५ ० % आरक्षण सुनिश्चत हो सके |
डॉक्टर भीम राव ने आरक्षण कि व्यवस्था देश हित के लिए सोचा था और संविधान के अनुरूप देश में लागू भी हुआ परन्तु सत्ता के लोलुप राजनीतिज्ञों ने इसको सत्ता भोग का साधन बना लिया । सुधारों के नाम पर सार्वजानिक प्रतिष्ठान बंद होने लगे और जो बंद नहीं हुए उनका विनिवेश कर दिया गया । इस प्रकार से सत्ता के लोलुप लोगो ने देश का बेडा गर्क कर दिया । यह प्रश्न है की जब हमारे पास सार्वजानिक प्रतिष्ठान रहेंगे ही नहीं तब हम किस प्रकार से आरक्षण की सुविधा मुहैया कराएँगे यह एक यक्ष प्रश्न है जहाँ सभी निरूत्तर है । आरक्षण नीति सही ढंग से लागू न होने के कारण दलित समाज का नुकसान भी हुआ है। डॉ. अंबेडकर की आशंका सही सिद्ध हुई। विधानसभा तथा लोकसभा में चुने हुए प्रतिनिधि दलित मुक्ति के सवाल पर देश हित समाज हित को तिलांजलि देकर नकारात्मक भूमिका में आ गए। मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि डॉ. अंबेडकर की जाति-उन्मूलन की विचारधारा को मूर्त रूप नहीं दिया जा सकता। ऐसा जनतंत्र राष्ट्रीय एकता के लिए वास्तविक खतरा है। डॉ. अंबेडकर की उक्ति- जातिविहीन समाज की स्थापना के बिना स्वराज प्राप्ति का कोई महत्व नहीं, आज भी विचारणीय है।
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जय शक्ति जय भारत
लेखिका [ सीमा गोयल ] सांवरी वोमेन पॉवर क्लब कि संस्थापिका है|
Saturday, 9 March 2013
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