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Monday, 9 September 2013

How to get Indian women on boards

Arun Duggal, Chairman, Shriram Capital in partnership with Anjali Bansal of Spencer Stuart India have spearheaded an initiative to get more women on corporate boards.
He speaks about the challenges and what the process has been like so far.

Tell us a little about yourself...
I am a retired banker. I spent the past 26 years in the Bank of America and this was my last posting before coming back to India.

I am now chairman of Shriram Capital. I am an independent director on several companies. I also teach and am a visiting faculty member at IIM Ahmedabad.
You’ve worked across the world and in leading organizations. Are you a risk taker? 

I’ve worked in various parts of banking and find it to be a process involving continuous challenges and learning.
What qualities do you look for when hiring graduates?
I don’t hire graduates so I will give a generic response here. One would look for technical competence, intellectual abilities, interpersonal skills and assessment in terms of morals and ethics.
You have started a program of mentoring women in the workplace. Is there a story/experience behind it that you’d like to share?
It was an issue that was being written about at the time. There was a lot of support for this idea. But the practical aspect was the availability for women at senior positions. We wanted to train between 50 and 60. But there are very few women already in these positions to train them.
We have people like Deepak Parekh, K V Kamath, Saroj Poddar, Hari Bhartia etc. who came on board. The idea is to one mentor would work with one woman for three months.
What does the term ‘board ready’ woman mean to you?
Better understanding of what regulations and law are. It means that a woman understands what it means to be an independent director with practical knowledge and human insight. She will be aware of strategy and corporate governance. She should know how an audit committee works and be ready to join a board of directors once the mentorship is complete.
How do women get involved in the initiative?
We are looking for 75 women of high potential. They can send their biodata and photo across to deepika@shriram.com .

Since we’re looking for people at the board level, we will be focusing on women who are above 40 and can demonstrate success in their professional life. We will be matching the skills of the women to that of the mentors. We are looking at training 100 women in the next 12 months.
How many applications have you received?
We have received around 75 applications. Most of them are from Mumbai and Delhi but we’ve also got a few from Hyderabad and Chennai. We need to match women with mentors in that city so it is easier for us to find mentors in larger cities. 
Is there anything else you would like to add?
According to the new Companies Act, there has to be one woman on the board. Now, 60 per cent of the BSE 500 companies don’t have a single female director so there is a gap in terms of requirement. Our effort is not a legal effort. We are looking at a high potential drive for women to be effective on boards.

Thursday, 29 August 2013

Women empowerment is an important & useful concept in the development of the community

There are umpteenth agreements which affirm women's rights but still women are more likely to be poor & illiterate vis-a-vis men. They can hardly avail medical care, property ownership, credit, training & employment. In political sphere they have no say & domestically they spend pathetic life. 

The relative status of men & women, the interaction between gender & race, class & ethnicity & question of rights, control, ownership, power & voice all have a critical impact on the success & sustainability of every development intervention.
Gender mainstreaming was defined by the United Nations Economic & Social Council in 1997 as a strategy for making women's as well as men's concerns & experiences an integral dimension of the policies & programmes in all political, economic & societal sphere so that women & men benefit equally & inequality is not perpetuated.

Women empowerment is not limited to control population explosion or financial independence rather it is a combination of literacy, employment & health. 

Women empowerment is an important & useful concept in the development of the community as it represents women as active agent rather than passive recipients of development policies.
If we really want to see our women empowered, then we must provide them best suitable education which will ultimately help them in improving their economic lot by getting suitable jobs both in the public & the private sectors of the country. 

Without giving education & jobs to our women especially of rural areas, all over dreams of making our women empowered will perish in open air. Besides this, women of our country should equally be given opportunities in making important decisions in the affairs of both house & society.

Friday, 16 August 2013

महिलाओं की समानता और अधिकारिता से संबंधित कानून

आज की उदारीकृत परिस्थितियों में महिलाएं भारतीय श्रम शक्ति का अभिन्‍न हिस्‍सा बन चुकी हैं। ऐसे माहौल में, महिला के रोजगार का स्‍तर बहुत महत्‍व रखता है और यह अनेक कारकों पर निर्भर करता है। इनमें सर्व प्रथम कौशल विकास के लिए शिक्षा एवं अन्‍य अवसरों का समान रूप से उपलब्‍ध होना है। इसके लिए महिलाओं की अधिकारिता के साथ-साथ उनके बीच उनके कानूनी अधिकारों और कर्त्तव्‍यों के बारे में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है। यह सुनिश्चित करने के‍ लिए भारत सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं।

यह ऐसे कई कार्यक्रम चला रही है जिनका उद्देश्‍य महिलाओं को शिक्षा एवं व्‍यावसायिक प्रशिक्षण की सुविधा देना है। इनमें सबसे महत्‍वपूर्ण है श्रम मंत्रालय में रोजगार और प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीई एण्‍ड टी)के अंतर्गत शुरू किया गया 'महिला व्‍यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम'। इस कार्यक्रम में कौशल प्रशिक्षण सुविधाओं में उनकी सहभागिता को बढ़ाकर उद्योग जगत (मुख्‍यतया संगठित क्षेत्र) में महिलाओं को अर्ध कुशल, कुशल और अति कुशल कामगारों के रूप में बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है। इस कार्यक्रम में, डीजीई एण्‍ड टी मुख्‍यालय में एक अलग --महिला प्रशिक्षण स्‍कंध'' स्‍थापित किया गया है जो देश में महिलाओं को व्‍यावसायिक प्रशिक्षण देने से संबंधित दीर्घावधिक नीतियां तैयार करने एवं उनका पालन करने के लिए जिम्‍मेदार है। साथ ही इस कार्यक्रम के एक भाग के रूप में, केन्‍द्रीय क्षेत्र में, देश भर के विभिन्‍न भागों में एक राष्‍ट्रीय और दस क्षेत्रीय व्‍यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान स्‍थापित किए गए हैं। जबकि राज्‍य क्षेत्र में, राज्‍य सरकारों के प्रशासनिक नियंत्रण मे विशिष्‍ट 'महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान (डब्‍ल्‍यूआईटीआई)' को नेटवर्क स्‍थापित किया गया है। ये संस्‍थान महिलाओं को बुनियादी कौशल प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।

साथ ही सरकार महिला कामगारों के लिए काम का अनुकूल माहौल बनाने के भी प्रयास कर रही है। इस प्रयोजनार्थ, मंत्रालय में महिला श्रमिकों के लिए एक अलग सेल स्थापित किया गया है जो कामकाजी महिलाओं की स्थितियों पर ध्‍यान केन्द्रित करेगा और उनमें सुधार लाएगा। इस सेल के कार्य निम्‍नलिखित हैं :-
  • राष्‍ट्रीय जनशक्ति और आर्थिक नीतियों के ढांचे के भीतर महिला श्रम शक्ति के लिए नीतियों एवं कार्यक्रमों को तैयार करना एवं समन्‍वय करना।
  • महिला कामगारों के संबंध में कार्यक्रमों के कारगर कार्यान्‍वयन
  • समान वेतन अधिनियम, 1976 के कार्यान्‍वयन की निगरानी करना।
  • समान वेतन अधिनियम, 1976 के तहत एक सलाहकार समिति की स्‍थापना करना।
  • महिला कामगारों के लिए कार्योन्‍मुखी परियोजनाओं को तैयार करने एवं कार्यान्वित करने के लिए गैर सरकारी संगठनों/स्‍वैच्छिक संगठनों को सहायता अनुदान देना।
इसके अलावा, महिलाओं की समानता और अधिकारिता के लिए अधिनियमित विभिन्‍न कानूनों में अनेक संरक्षणात्‍मक उपबंध शामिल किए गए हैं, जिनके उचित प्रवर्तन से महिला कामगारों के लिए एक समर्थकारी माहौल निर्मित होगा।

Tuesday, 14 May 2013

सार्वजानिक सम्मान

यदि वास्तव में ही आप नारी के प्रति अपने मन में सम्मान की भावना रखते हैं तो अपनी कामयाबी का श्रेय अपनी पत्नी को भी देना सीखिए क्योंकि कंही न कहीं आपके उन्नति का प्रेरणा स्रोत और सूत्रधार आपकी अर्धांग्नी ही है । जो जाने अनजाने हमेशा आपके साथ रहती है । जरा गौर करे हमारे देश में लगभग सारे व्रत केवल पत्नी ही रखती है। अपने पति के कुशलता के लिए कुछ बहने तो पानी तक नहीं लेती, सोचिये क्या यह त्याग विचारणीय नहीं है।
मुझे तो ऐसा लगता है कि जो अपने जीवन में पत्नी के योगदान को नहीं समझ पाते क्या अपने जीवन में, देश के प्रति, मात्रभूमि के प्रति, स्त्री के योगदान को क्या समझेंगे।
समाचार देखते हुए मैंने ये सुना और देखा था की अपनी विजय के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा जब विक्ट्री स्पीच देने आये तो उन्होंने यह कहा कि आज मै जहा भी हूँ वंहा तक अपनी पत्नी मिशेल की वजह से पहुच पाया हूँ । खुशी के उन सार्वजानिक पलो में अपना पहला धन्यवाद उन्होंने पत्नी को समर्पित किया । पराजय के बाबजूद श्री मिट रोमनी भी अपनी पत्नी को दिए सह्यॊग के लिए धन्यवाद देना नहीं भूले । अपनी जीत पर अपने जीवन संगिनी के साथ खड़े होने , संघर्ष करने और सार्वजानिक रूप से उसके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना । यह तभी संभव है जब केवल मूंह से नहीं बल्कि मन से दिल से महिलाओं का सम्मान हो। 
यह आवश्यक नहीं है कि आपकी पत्नी एक अच्छी बिज़नस वोमेन हो वकील हो डॉक्टर हो या इंजिनियर हो यदि वो घर पर रहकर एक होम मेकर का रोल अदा कर रही है तो मेरा यह मानना है कि एक अच्छे घर को बनाना शायद एक अच्छे बिज़नस को को चलाने से ज्यादे कठिन है।
नारी के अन्दर भगवान ने इतना पेशेंस दिया है कि वह घर में रहकर हर रिश्ते को भरपूर तरीके से जीती है । कभी बहू के रूप में कभी माँ के रूप में और कभी पत्नी के रूप में वह परिवार के लिए सहारा बनती है । अपने बच्चों को जो हमारे और हमारे देश का भविष्य होते हैं अच्छे संस्कार देती हैं जो लाखों की संपति देने के बजाय ज्यादा जरूरी है |
मेरे विचार से एक पति के द्वारा दिया हुआ यह सार्वजानिक सम्मान पत्नी के लिए सबसे उत्तम सम्मान है।

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जय शक्ति जय भारत
लेखिका [ सीमा गोयल ] सांवरी वोमेन पॉवर क्लब कि संस्थापिका है|

Sunday, 14 April 2013

संविधान के वास्तुकार अम्बेडकर जी का जन्म दिन और वर्तमान भारत

भारतीय संविधान के वास्तुकार अम्बेडकर जी ने हमारे देश को और हमारे समाज को जो दिया है शायद हम उसकी तुलना नहीं कर सकते जब डॉक्टर साहेब 1942 में गवर्नर जनरल की कौंसिल में शामिल हुए तथा जब श्रम मंत्री का दायित्व संभाला तो उन्होंने  इस अवसर का भरपूर उपयोग देश की उन्नति और प्रगति के लिए किया. उन्होंने मजदूरों की दयनीय दशा देखते हुए उनके लिए काम के लिए 8 घंटे का समय तय करवाया, महिला मजदूरों के लिए प्रसूति अवकाश की व्यवस्था लागू की। 

देश में वर्षा के मौसम में आने वाली बाढ़ और गर्मी में सूखे की समस्या से निजात पाने तथा रोज़गार के लिए उद्योग लगवाने के लिए बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना का ड्राफ्ट स्वयं तैयार किया. आधुनिक भारत में चल रही सभी नदी घाटी परियोजनाए बाबासाहब की दूरदर्शिता का ही परिणाम है। यह बात शायद बहुत कम लोगो को पता होगी क्योंकि सामान्यतया बाबा साहेब का नाम आते ही लोग संविधान तक ही सिमट के रह जाते हैं।

बाबासाहब ने संविधान को देश में समता और स्वतंत्रता स्थापित करने का एक कानूनी माध्यम के रूप में स्थापित किया और इसके द्वारा देश से छूआछूत, जातिवाद, लिंगभेद और वर्गभेद सहित तमाम विषमताओं का खात्मा कर दिया पर वे भली भांति जानते थे की कानून से सिर्फ किसी अपराध को नियंत्रित किया जा सकता है|

आज हम जहाँ भी देखते हैं हर 15 किलो मीटर के बाद 1 या 2 मूर्ति तो नजर आ ही जाती है । बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर जी की लेकिन क्या सही मायने में यही उनके विचारों की अभिव्यक्ति है।  आज का भारतीय जनतंत्र पूर्णरूपेण जातीय, क्षेत्रीय एवं सांप्रदायिक जनतंत्र में बदल चुका है। जहाँ पर कुछ  लोग अल्पकालिक स्वार्थ सिद्धि के लिए बाबा  साहेब के नाम का प्रयोग करते हैं लेकिन मुख्य विचारधारा से वो कोसों दूर है । बाबा साहेब ने जाति-उन्मूलन की विचारधारा पर बल दिया था । जहाँ पर कोई धर्म अगर है तो वह मानव धर्म है परन्तु वर्तमान तथा भुत पर अगर दृष्टी डाले तो हम पाते हैं कि वास्तविकता कुछ और ही है । जाति विहीन समाज कि कल्पना के विपरीत होकर वर्तमान समाज और भी निंदनीय होता जा रहा  है|

डॉक्टर भीम राव ने कहा था कि मै किसी समुदाय की प्रगति उस मापदंड से करता हूँ कि उस समुदाय की महिलाओं ने किस हद तक तथा कितनी  प्रगति हासिल की है । जान के  आश्चर्य  होगा कि २१७  सदस्यों कि संघीय सभा में १५ महिलायें थी । आज ६ ६ वर्षों के उपरान्त  हमारे लोकसभा में मात्र ५ ९ महिला सांसद है । मैंने ये देखा है कि हर सत्र में इस विषय [५ ० फीसदी सीट लोकसभा तथा  राज्य सभा  में ] पर  चर्चा तो  अवश्य होती है । परन्तु  हमारे राजनीतिज्ञ यह स्वीकार करने को बिलकुल भी तैयार नहीं है कि  ५ ० % महिला प्रतिनिधि की संख्या हमारे संसद में सुनिश्चित हो जाये ।  इसका मुख्य कारण राजनीतिज्ञों में दृढ इच्छासक्ति तथा  कुशल नेतृत्व का अभाव है। हमारे राजनीतिज्ञ इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि महिला वर्ग को ५ ० % आरक्षण सुनिश्चत हो सके |

डॉक्टर भीम राव ने आरक्षण कि व्यवस्था देश हित के लिए सोचा था और संविधान के अनुरूप देश में लागू भी हुआ परन्तु  सत्ता के लोलुप राजनीतिज्ञों ने इसको सत्ता भोग का साधन बना लिया । सुधारों के नाम पर सार्वजानिक प्रतिष्ठान बंद होने लगे और जो बंद नहीं हुए उनका विनिवेश कर दिया गया । इस प्रकार से सत्ता के लोलुप लोगो ने देश का बेडा गर्क कर दिया । यह प्रश्न है की जब हमारे पास सार्वजानिक प्रतिष्ठान रहेंगे ही नहीं तब हम किस प्रकार से आरक्षण की सुविधा मुहैया कराएँगे यह एक यक्ष प्रश्न है जहाँ सभी निरूत्तर है । आरक्षण नीति सही ढंग से लागू न होने के कारण दलित समाज का नुकसान भी हुआ है। डॉ. अंबेडकर की आशंका सही सिद्ध हुई। विधानसभा तथा लोकसभा में चुने हुए प्रतिनिधि दलित मुक्ति के सवाल पर देश हित समाज हित को तिलांजलि देकर नकारात्मक भूमिका में आ गए। मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि डॉ. अंबेडकर की जाति-उन्मूलन की विचारधारा को मूर्त रूप नहीं दिया जा सकता। ऐसा जनतंत्र राष्ट्रीय एकता के लिए वास्तविक खतरा है। डॉ. अंबेडकर की उक्ति- जातिविहीन समाज की स्थापना के बिना स्वराज प्राप्ति का कोई महत्व नहीं, आज भी विचारणीय है।

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जय शक्ति जय भारत
लेखिका [ सीमा गोयल ] सांवरी वोमेन पॉवर क्लब कि संस्थापिका है|

Monday, 4 March 2013

सांवरी वोमेन पॉवर क्लब द्वारा स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन तथा पीतमपुरा शाखा का सुभारंभ

पीतमपुरा, दिनांक 24 फ़रवरी को प्रातः काल 9 बजे से अग्रसेन भवन , सांवरी क्लब की नूतन शाखा के सुभारम्भ के सुभ अवसर पर  चिकित्सा जाँच शिविर तथा भारतीय महिला पुरस्कार" इंडियन वोमेन अवार्ड " नामक समारोह  का आयोजन किया गया ।  शिविर में सांवरी वोमेन क्लब  की  संस्थापिका  श्रीमती सीमा गोयल  जी का विशेष योगदान रहा । सांवरी क्लब का यह प्रयास नारी समाज के उत्थान के लिए किया गया एक प्रयाश है तथा सांवरी प्रबन्धन यह आशा करती है कि आने वाले समय में हमारे किये प्रयाश हर जरूरतमंद महिला को मिले , इन्ही सामाजिक पहलुवों को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने पीतमपुरा में एक शाखा खोली है । 
इस विशेष अवसर पर समाज की अनेक महिलाओं को जिन्होंने भिन्न - भिन्न विषय क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाते हुए समाज व  महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य किये हैं, उन्हें इंडियन वीमेन अवार्ड से सम्मानीत किया गया,इस सुभ अवसर पर श्रीमती आरती गर्ग, श्रीमती  पूनम गुप्ता  तथा श्रीमती सीमा  गोय के नेतृत्व में  सांवरी वोमेन पॉवर क्लब की पीतमपुरा शाखा का सुभारंभ भी हुआ ।

 स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वस्थ नारी का होना आवश्यक है। इन विषयों पर ध्यान आकर्षण करते हुए संस्थापिका महोदया ने मुख्य अतिथि श्रीमती व श्रीमान अनिल भारद्वाज [विधायक दिल्ली प्रदेश, संसदीय सचिव दिल्ली सरकार ], श्रीमती आभा चौधरी [ प्रेजिडेंट दिल्ली महिला प्रदेश कांग्रेस ], श्रीमती गीता यादव निगम पार्षद, जी का स्वागत किया ।
श्रीमती सीमा गोयल जी के नेतृत्व में स्वास्थ्य शिविर में मशहूर चिकित्सका गीता मेहंदीरत्ता [ प्रसूति रोग  सर गंगा राम हॉस्पिटल ] व आयुर्वेद आचर्य पारुल गुप्ता [ मृतुन्जय सेंटर फॉर ओबेसिटी ] ने महिलाओं  को स्वास्थ्य जागरूकता तथा नारी स्वास्थ्य के मुख्य बिन्दुओं पर प्रकाश डाला ।
महिलाओं के साथ साथ सांवरी वोमेन पॉवर क्लब के सौजन्य से बच्चो ने स्वास्थ्य शिविर का भी लाभ लिया । वासन ऑय केयर के सौजन्य से महिलाओं तथा बच्चो के आँखों की जाँच करवाई तथा थाईरोकेयर का भी शिविर में विशेष सहयोग रहा । 

 सांवरी क्लब की मुख्य संरक्षिका श्रीमती पूनम गुप्ता ने शिविर में आये सभी लोगों का आभार व्यक्त किया तथा इतनी बड़ी उपस्थिति  को देखकर उन्होंने सम्पूर्ण नारी ससक्तिकरण के अपने विचार को आगुन्तको के समक्ष  पुनः स्मरण कराया और कहा कि यही हमारे आयोजन की सार्थकता है ।




 श्रीमती  गोयल ने उपस्थित सभी महिलाओं के साथ साथ वासन आई केयर थाइरोकेयर सरोज हॉस्पिटल टीम, डॉक्टर गीता मेहंदीरत्ता, सर गंगाराम हॉस्पिटल  व  डॉक्टर पारुल गुप्ता मृतुन्जय सेंटर फॉर ओबेसिटी से मिले सहयोग के लिए सांवरी प्रबंधन तथा परिवार के तरफ से  आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मंच नारी  समाज को मौका और सुविधायें देता है जो उनके अंदर समाहित क्षमता को समाज के सम्मुख लाने में मदद करता है । तथा प्रत्येक दृश्य में महिलाओं को प्रोत्साहित करना ससक्त बनाना ही लक्ष्य है ।












 श्रीमती गोयल ने कहा कि बहनों जीवन एक खेल है और इसे ख़ूबसूरती के साथ खेलना होगा बिना जीत हार का ध्यान किये क्योंकि जीत जीवन का नाम नहीं है।जीवन में जीत और चुनौतिया दोनों उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने दिन और रात। अगर रात होगी नहीं तो दिन का अनुमान कैसे होगा। चुनौतियों से भागना पलायन है।  उसके साथ में रहकर आप चुनौतियों का सामना बखूबी कर सकती हैं।  हमे अपने सोच से बाहर आना होगा  सती प्रथा, बाल विवाह  भी एक नारीगत सामाजिक चुनौती थी । लेकिन हमने हटाया इसी तरह कोई भी ऐसी बात हमारे बीच में है जो नारी सम्मान के लिए अहितकर है, तो समाज को आगे आकर इसको हटाना होगा परन्तु सबकी सहमती से किया गया कार्य सराहनीय और दीर्घकालिक होगा क्योंकि इसमें सबकी जिमेदारी होती है सरकार, समाज, कानून की। अगर हम सभी संगठित होकर रहे तो नारी समाज में जाग्रति के साथ -साथ महिला ससक्तिकरण के कार्य रूपी लक्ष्य को हम अवस्य ही पूरा कर लेंगे।

 जय हिन्द जय शक्ति 

Saturday, 2 March 2013

Sanwari Women Power Club [Women's Health is Society's Wealth]

Sanwari Women Power Club [Women's Health is Society's Wealth ]  

The Sanwari Pitampura Branch Inauguration Event was a full day function with the first half being the health Camp for women & the latter part is of recognizing & rewarding the Sanwari Members for their outstanding contribution to the concept of women empowerment. 
















Monday, 17 September 2012

Innovative Programs for Women Empowerment



Opportunities are unlimited but guidance is crucial. This is true for visionary women who aspire to make their mark felt in the world of success, leadership and business. Our Sanwari Club is a platform for women empowerment through knowledge sharing and professional networking.