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Saturday, 24 September 2016
Friday, 25 March 2016
Strong Women Strong India Seminar on Women's Day
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के शुभ अवसर पर सांवरी वोमेन एम्पावरमेंट के तरफ़ से Strong Women Strong India सेमिनार का आयोजन मंगलम पैराडाइज़, सेक्टर-३, रोहिणी नई दिल्ली में किया गया इसमें लगभग ३०० से अधिक महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।
विगत कई वर्षो से सांवरी वोमेन एम्पावरमेंट संस्थान का नारी सशक्तिकरण के लिए किया गया हर एक सेमिनार, कार्यशाला का मुख्य उद्देस्य समाज में उपस्थित महिलाओं के लिए एक प्रेरक का कार्य करता हैं, जिसके कारण हर एक महिला अपने अंदर छुपी गुण, शक्तियों का एह्साश कर सके और एक सफल समाज का आघार मजबूत हो सके। क्योकि महिला सशक्तिकरण पूर्ण रूप से तब तक फ़लीभूत नहीं हो सकता जबतक पूरे समाज के अंदर आर्थिक ,राजनैतिक ,प्रशासनिक, सामाजिक समानता नहीं हो जाती, इसमें महिला के साथ पुरुष वर्ग की भी उतनी ही जरूरत है जितनी एक दिया के जलने के लिए तेल की। हम पुनः इस बात को सम्पूर्ण सशक्तिकरण का हिस्सा मानते है |
सामजिक और पारिवारिक व्यवस्था को पूर्णत्व प्रदान करने के लिए साथ साथ ही चलना होगा.
Friday, 17 April 2015
अशिक्षा का कारण केवल साधन हीनता नहीं बल्कि उपेक्षा भी है
अशिक्षा का कारण केवल साधन हीनता नहीं बल्कि उपेक्षा भी है ", इस सोच के तहत दिनांक १७ अप्रैल २०१५ को सांवरी वोमेन की ओर से एक कार्यकम का आयोजन नगर निगम आदर्श प्राथमिक बालिका विद्यालय, राउज एवेन्यू दिल्ली में किया गया
इस कार्यक्रम में मेधावी बालिकाओं को पुरस्कार वितरण, मेरिट सर्टिफिकेट, कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया और बच्चों को शिक्षा के महत्व को समझाते हुए सम्बोधित किया गया ताकि उनकी प्रतिभा के समग्र विकाश हो सके,शैक्षिक रुचि बढे और उसके प्रति ललक बनी रहे ताकि बच्चे साल के बीच में पढाई न छोड़े और समाज के पिछड़े वर्ग के अबोध बालिकाओं के अंदर एक आत्मसम्मान तथा शिक्षा के प्रति रूचि में प्रगाढ़ता आये।
यद्द्पि हमारी सरकार भिन्न भिन्न प्रकार के शैक्षिक कार्यक्रम जैसे सर्व शिक्षा अभियान आदि चला रही है ताकि वो लगभग सभी बच्चों को शैक्षिक रूप से सबल बना सके और काफी हद तक यानि यूं कहे ९३% तक सफल भी रहा परन्तु काफी सारे ६ से १७ वर्ष के बच्चे स्कूल छोड़ के पहले ही पलायन कर जाते है यह एक विषम समस्या है। यदि हम गौर करें तो पाते है की इसमें बालिकाओं का औसत लगभग २१. ८ है [ ये आकड़ें institute of Applied manpower के हैं ] जो की निहायत ही चिंताजनक है और शिक्षा का अभाव ही नारी समुदाय के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण है जो कोढ़ की तरह सामाजिक विकृति फ़ैलाने का एक मात्र निमित्त है ।
सांवरी वोमेन एम्पावरमेंट का उद्देश्य है कि नारी उत्थान से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नारी की प्राथमिक कड़ी बालिकाओं के
समग्र विकाश हेतु रचनात्मक कार्यों को महत्ता दी जाये और इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु विगत ४ वर्षों से लगभग २०० नारी शक्ति जो कि भिन्न भिन्न क्षेत्रो से है अपना अतुलनीय सहयोग दे रही है |
सांवरी वोमेन की संस्थापिका श्रीमती सीमा गोयल जी के साथ श्रीमती रेणू अग्रवाल, नीतू सिंगल, इति गुप्ता, रानी गोयल, पूनम गुप्ता जी तथा अन्य सांवरी सदस्यों का यह प्रयाश काफी सारे सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखकर महिलाओं को जागरूक करने हेतु भिन्न - भिन्न प्रकार के क्रिया कलापों को अंजाम दे --रहा है जैसे -- महिलाओं के लिए मुफ्त चिकित्सा शिविर, बच्चो के लिए कॉपी किताब, ज्ञानवर्धक पुस्तकें, गर्म कपड़ों का वितरण, सोल एंड पीस सेमिनार, प्रतिभावान महिलाओं को सम्मानित तथा पुरस्कृत करना, नेचुरल हीलिंग वर्कशॉप, नारी विषयक परिचर्चा तथा भिन्न भिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से वोमेन एम्पावरमेंट सरीखे लेख आदि इसी क्रम में हर प्रकार की महिलाओं के समग्र मानसिक विकाश हेतु समय समय पर सेमिनार आदि का आयोजन भी करती रही है |
भवदीय
सीमा गोयल
Friday, 16 August 2013
Ministry of WCD implementing scheme for Children of Women Prisoners
The Ministry of Women and Child Development is implementing a Centrally Sponsored Scheme, namely, Integrated Child Protection Scheme (ICPS) from 2009-10 for children in conflict with law as well as children in need of care and protection, including, children of women prisoners. Under ICPS, financial assistance is provided to State Governments/UT Administrations, inter-alia, for setting up and maintenance of various types of Homes, including, Children Homes.
These Homes provide inter-alia, shelter, food, education, medical attention, vocational training, counselling etc. to such children so that they can ultimately reintegrate into the mainstream society. Besides, the Ministry is also implementing another Scheme, namely, Scheme for the Welfare of Working Children in Need of Care and Protection under which non-formal education, vocational training, to such children is provided to facilitate their entry/re-entry into mainstream education in cases where they have either not attended any learning system or where for some reasons their education has been discontinued with a view to prevent their continued future exploitation.
This was stated by Smt. Krishna Tirath, Minister for Women and Child Development, in a written reply to the Rajya Sabha on Wednesday, 14 August 2013
Monday, 5 August 2013
सिर्फ शिक्षित होना काफी नहीं, हमें बुद्धिजीवी भी होना पड़ेगा
आज हमारे देश में चारों तरफ हर व्यक्ति को शिक्षित करने की जो लहर चल रही है। वह वास्तव में काबिले तारीफ है। सरकार और समाज ने भी हर बच्चे को शिक्षा देने के लिए कई योजनायें बनाई है। इस प्रयास से बहूत लॊग शिक्षा प्राप्त भी कर रहें है। परन्तु ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस प्रकार के किताबी ज्ञान से हम सिर्फ शिक्षित बनते है, बुद्धिजीवी नहीं।
शिक्षा को एक नए रूप में सामने लाना होगा। ज्ञान ऐसा हो जो डिग्री - डिप्लोमा लेने के साथ साथ हमारी सोच , व्यवहार को भी प्रशस्त करे, हमारे आचार और विचार सराहनीय बने। जीवन में दोहरे मापदंड न हों। जो हम अपने लिए चाहते है, वही सबके लिए चाहें। हमे दकियानूसी विचारों को संशोधित कर नए विचारों के साथ आत्म सात करने की आवश्यकता है, ताकि नए विचारों का भी स्थान सुनिश्चित हो सके।
शिक्षा ऐसी हो जो हमें संस्कारी, अनुसाशित और संयत से परिपूर्ण बनाये क्योंकि जीवन सिर्फ धन- दौलत से सुंदर नहीं बनता । जब संस्कारों की सम्पति आती है, तभी वह सुंदर बनता है। शिक्षा के विकाश के साथ आर्थिक, चारित्रिक, सामाजिक विकाश का सही समावेश आवश्यक है। तभी सही मायनों में हम शिक्षित के साथ बुद्धिजीवी बन पाएंगे।
जय हिन्द
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